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नरगिस की शादी की खबर सुनकर फूट-फूट कर रोए थे राज कपूर, जनाजा उठा तो रहे पीछे

नरगिस की शादी की खबर सुनकर फूट-फूट कर रोए थे राज कपूर, जनाजा उठा तो रहे पीछे


3 मई 1981 को महान अदाकारा नरगिस दत्त ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। नरगिस ने साल 1935 में बतौर बाल कलाकार फिल्म तलाश-ए-हक से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। नरगिस ने राज कपूर के साथ कई सफल फिल्मों में काम किया और फिर मार्च 1958 में नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली। उनकी पुण्यतिथि पर आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।
'मदर इंडिया' में बुजुर्ग महिला का किरदार निभाने वाली पहली अभिनेत्री थीं नरगिस। इस फिल्म में नरगिस ने 28 साल की उम्र में एक बुजुर्ग महिला का किरदार निभाया था। नरगिस की इस फिल्म को 1958 में ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट किया गया था। चार दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली इस अभिनेत्री की हसरत डॉक्टर बनने की थी. 'मदर इंडिया' की शूटिंग के दौरान सेट पर आग लग गई थी। इस फिल्म में नरगिस के साथ सुनील दत्त भी थे। सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाया था सुनील दत्त खुद काफी जल गए वो इतने ज्यादा जल गए थे कि बार-बार बेहोश होने लगे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया इसी बीच सुनील दत्त की बहन बीमार पड़ गईं। वे मुंबई में किसी डॉक्टर को नहीं जानते थे बिना सुनील दत्त को बताए नरगिस उनकी बहन को लेकर अस्पताल चली गईं और इलाज करवाया। जिसके बाद दोनों में प्यार हो गया।
मार्च 1958 में दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली। साल 1959 में दोनों ने अपनी शादी के बारे में औपचारिक तौर पर लोगों को बताया और एक रिसेप्शन भी दिया। सुनील दत्त से पहले नरगिस राज कपूर पर पूरी तरह समर्पित रहीं। कहा जाता है राज कपूर नरगिस को पहली ही नजर में दिल दे बैठे थे। राज कपूर नरगिस से बहुत प्यार करते थे लेकिन वो पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे थे लेकिन बावजूद इसके राज कपूर नरगिस से कई बार कह चुके थे कि वो उनसे शादी करेंगे।
9 साल लंबे रिश्ते के बाद नरगिस को जब ये लगने लगा था कि अब राज उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे और राज कपूर न तो अपनी शादी तोड़ सकते थे न ही अपने पिता से बगावत कर सकते थे। ऐसे में नरगिस ने उनके साथ अपने रिश्ते खत्म कर लिए। मधु जैन अपनी किताब में लिखती हैं, 'जब उन्हें पता चला कि नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली है तो राज कपूर अपने दोस्तों और साथियों के सामने फूट फूट कर रोए। किताब 'द ट्रू लव स्टोरी ऑफ नरगिस' के मुताबिक राज कपूर से अलग होने के बाद वो आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगी थीं।
राज कपूर के जीवन की ये विडंबना थी कि वो नरगिस से उनकी पहली मुलाकात उनकी शादी होने के सिर्फ़ चार महीने बाद हुई। उनके धर्म भी अलग अलग थे। नरगिस को बॉलीवुड करियर में बहुत मान-सम्मान मिला। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मनित किया गया था। 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार ने उन्हें राज्यसभा सदस्य भी बनाया। मुंबई के बांद्रा में उनके नाम पर सड़क है। हर साल हो रहे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म को नरगिस दत्त पुरस्कार दिया जाता है।


मधु जैन अपनी किताब, 'फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स' में लिखती हैं, नरगिस ने अपना दिल, अपनी आत्मा और यहां तक कि अपना पैसा भी राज कपूर की फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया। जब आर के स्टूडियो के पास पैसों की कमी हुई तो नरगिस ने अपने सोने के कड़े तक बेच डाले थे। कहा तो यहां तक जाता है कि नरगिस की शादी की खबर सुनकर राज कपूर अपने आप को सिगरेट बटों से जलाते, ये देखने के लिए कि कहीं वो सपना तो नहीं देख रहे। नरगिस के जीवनीकार टीजेएस जॉर्ज लिखते हैं, इसके बाद से ही राज कपूर ने बेइंतहा शराब पीनी शुरू कर दी।
राज कपूर को हमेशा ये लगता रहा कि नरगिस ने उन्हें धोखा दिया है। 1986 में दिए एक इंटरव्यू में राज कपूर ने कहा था मदर इंडिया साइन करने को लेकर नरगिस ने मुझे धोखा दिया था। सालों बाद जब नरगिस दत्त का अंतिम संस्कार हुआ तो राज कपूर उनके जनाजे में आम लोगों के साथ सबसे पीछे चल रहे थे। हर कोई उन्हें आगे उनके पार्थिव शरीर के पास जाने के लिए कह रहा था लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी।
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