नीरजा भनोट जयंती: भारत की इस बहादुर बेटी को पाकिस्तान सरकार ने दिया था ‘तमगा-ए-इंसानियत’ का अवॉर्ड - BackToBollywood

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नीरजा भनोट जयंती: भारत की इस बहादुर बेटी को पाकिस्तान सरकार ने दिया था ‘तमगा-ए-इंसानियत’ का अवॉर्ड

नीरजा भनोट जयंती: भारत की इस बहादुर बेटी को पाकिस्तान सरकार ने दिया था ‘तमगा-ए-इंसानियत’ का अवॉर्ड

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नीरजा भनोट

भारत गौरव नीरजा भनोट (Neerja Bhanot) की आज जयंती है। नीरजा एयर होस्टेस थी और आज के ही दिन 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ के एक पंजाबी परिवार में उनका जन्म हुआ था। नीरजा की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ में ही हुई इसके बाद उनका पूरा परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया। मुंबई में नीरजा ने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उन्हें कई मॉडलिंग असाइनमेंट मिलने लगे और यहीं से नीरजा का मॉडलिंग करियर की शुरुआत हुई। नीरजा ने करीब 22 ऐड फिल्मों में काम किया था।

नीरजा (Neerja Bhanot) के बारे में कहा जाता है कि वो सुपरस्टार राजेश खन्ना की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं और दोस्तों के बीच अकसर उनके डॉयलॉग की नकल किया करती थीं। मार्च 1985 को महज 22 साल की ही उम्र में परिवारवालों के दवाब के कारण नीरजा की शादी कर दी गई। इसके बाद नीरजा अपने पति के साथ कतर चली गईं। इस बीच नीरजा के ससुरालवाले उनसे दहेज की बेबुनियाद मांग करने लगे। जिससे आजीज आकर शादी के दो महीने के भीतर ही नीरजा अपने परिवार के पास मुंबई वापस आ गईं।

मुंबई आकर नीरजा (Neerja Bhanot) ने नौकरी के लिए अप्लाई किया और पैन अमेरिकन वर्ल्ड एयरवेज (पैन एएम) फ्लाइट में बतौर फ्लाइट अटेंडेंट उनकी नौकरी लग गई।

5 सिंतबर 1986 को पैन एएम की मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए जाने वाली फ्लाइट 73 में बतौर सीनियर पर्सर सवार हुईं। अमेरिका जाने वाली इस फ्लाइट का पहला पड़ाव कराची था। पैन एएम की ये प्लेन जैसे ही कराची एयरपोर्ट पर लैंड हुई त्यों ही इसे 4 हथियारबंद लोगों ने हाईजैक कर लिया। उस समय फ्लाइट में 360 यात्री और 19 क्रू मेंबर्स के लोग मौजूद थे। प्लेन हाईजैक की भनक लगते ही नीरजा (Neerja Bhanot) ने चालक दल के तीनों सदस्यों को फौरन फ्लाइट से भगा दिया।

ये चारो आतंकवादी आतंकी संगठन ‘अबू निदान’ के सदस्य थे और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए पैन एएम के विमान को हाईजैक किये थे।

दरअसल पाकिस्तानी आतंकी अमेरिकी फ्लाइट को इजराइल में क्रैश कराना चाहते थे लेकिन नीरजा (Neerja Bhanot) ने उनका सारा प्लान फेल कर दिया। इस घटना से बचकर निकले यात्री माइकल थेक्सटन ने एक किताब लिखी थी। जिसमें माइकल ने दावा किया कि उन्होंने हाईजैकर्स को बात करते हुए सुना था कि वे जहाज को इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे।

इस प्लेन हाईजैक के दौरान आतंकियों ने नीरजा (Neerja Bhanot) और बाकी क्रू मेंबर्स को बुलाया और कहा कि वो सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्रित करें ताकि वो किसी अमेरिकन को मारकर पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बना सकें। नीरजा ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट जमा किए लेकिन विमान में बैठे 5 अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट छुपाकर बाकी पासपोर्ट आतंकियों को सौंप दिए।

आतंकियों ने एक ब्रिटिश नागरिक को विमान के गेट पर लाकर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि अगर विमान के लिए पायलट नहीं भेजा तो आतंकी ब्रिटिश नागरिक को मार देंगे। लेकिन नीरजा (Neerja Bhanot) ने उस आतंकियों से बात करके ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया।

कराची में प्लेन का ईंधन भरा जाना था और अँधेरा भी गहरा रहा था। नीरजा (Neerja Bhanot) को इसी समय का इंतजार था। शाम होते ही नीरजा ने प्लेन के इमरजेंसी डोर को खोलकर विमान में बैठे यात्रियों को उस दरवाजों से बाहर कूदने का इशारा कर दिया। अचानक यात्रियों को अंधेरे में प्लेन से कूदकर भागता देख आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान पाकिस्तानी सेना के जवानों ने भी आतंकियों को न्यूट्रलाइज करने का ऑपरेशन शुरू कर दिया। विमान से कूदने-भागने के दौरान कुछ यात्री घायल भी हो गये लेकिन इनमें से सभी 360 यात्रियों की जान सुरक्षित बच गई।

विमान के सभी यात्रियों को बाहर निकालने के बाद नीरजा (Neerja Bhanot) ने ज्यों ही इमरजेंसी डोर से छलांग लगाने की सोची त्यों ही उसे विमान के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने 4 में से 3 आतंकियों को ठिकाने लगा दिया था जबकि एक विमान में ही छिप गया। इसी बीच विमान में छूटे बच्चे को लेकर नीरजा जैसे ही इमरजेंसी गेट के करीब पहुंची, अचानक से चौथा आतंकी उसके सामने बंदूक तान दी। नीरजा ने फौरन बच्चे को बाहर खड़े पाक सेना के जवान के हाथों में फेंक दिया और खुद उस आतंकी से भिड़ गई।

हथियारबंद आतंकी से नीरजा की जद्दोजहद ज्यादा देर नहीं चल सकी और उसने नीरजा (Neerja Bhanot) के सीने में कई गोलियां उतार दी। नीरजा वहीं पर शहीद हो गईं। नीरजा के इस बलिदान पर भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के लोगों के भी आंसू निकल आये थे।

नीरजा (Neerja Bhanot) को इस अदम्य साहस के लिए भारत में ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया तो वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी उन्हें ‘तमगा-ए-इंसानियत’ सम्मान से नवाजा। अमेरिका ने उन्हें ‘जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। नीरजा ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित होने वाली भारत में सबसे कम उम्र की पहली युवा शख्स बनीं। इसी के साथ ही नीरजा भनोट को समूची दुनिया ‘हीरोइन ऑफ हाइजैक’ के नाम पहचानती है।

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