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सायरा बानो का ‘राजकुमारी’ से लेकर ‘बिंदु’ बनने तक कुछ ऐसा रहा था सफ़र

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सायरा बानो का ‘राजकुमारी’ से लेकर ‘बिंदु’ बनने तक कुछ ऐसा रहा था सफ़र
वर्ष 1968 में रिलीज़ कॉमेडी फिल्म ‘पड़ोसन’ ने सायरा बानो को रातों-रात शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया था। यूं तो सायरा ने इस फिल्म से पहले कई फिल्मों में काम किया था, मगर इस फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया ‘बिंदु’ का किरदार लाखों लोगों के दिलों की धड़कन बन गया। यही वजह है कि यह फिल्म उनके सिने कॅरियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुईं। सायरा बानो के जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन के कुछ दिलचस्प और अनसुने किस्से..


सायरा बानो का ‘राजकुमारी’ से लेकर ‘बिंदु’ बनने तक कुछ ऐसा रहा था सफ़र

सायरा को विरासत में मिली एक्टिंग

सायरा बानो का जन्म 23 अगस्त, 1944 को उत्तराखंड राज्य में देहरादून के पास मसूरी में हुआ। उनकी मां नसीम बानो भी हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री थीं, वहीं सायरा के पिता मियां एहसान-उल-हक अपने जमाने के मशहूर फिल्म निर्माता हुआ करते थे। घर में फिल्मी माहौल होने के कारण सायरा बानो का रुख फिल्मों की तरफ हुआ। सायरा कम उम्र में ही पढ़ाई करने लंदन चली गई थीं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। सायरा की बचपन से ही दिलचस्पी अभिनय के क्षेत्र में थी। वे एक सफल अभिनेत्री बनने का सपना देखा करती थी। अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने फिल्मों में काम करने का फैसला किया।

16 साल की उम्र में शुरु हो गया था एक्टिंग कॅरियर

सायरा बानो ने महज 16 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। उनकी पहली फिल्म ‘जंगली’ वर्ष 1961 में रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट शम्मी कपूर थे। फिल्म में सायरा ने अपनी रुमानी अदाओं से सभी को दीवाना बना दिया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी हिट साबित हुई। इसके साथ ही सायरा बानो अपनी डेब्यू फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ‘फिल्मफेयर अवॉर्ड’ हासिल करने में सफल रहीं। इस फिल्म को मिली सफलता ने सायरा को फिल्म इंडस्ट्री का चहेता बना दिया था। इसके बाद उन्हें एक के बाद एक फिल्में मिलती चली गईं। 60 और 70 का दशक सायरा बानो के लिए सुनहरा दौर साबित हुआ।

इस दौरान उन्होंने बॉलीवुड को कई हिट, सुपरहिट फिल्में दी। बॉलीवुड में सायरा अब सफल अभिनेत्री के रुप में पहचान बना चुकी थी। वर्ष 1967 सायरा के फिल्मी कॅरियर के लिए बेहद अहम साबित हुआ। इस साल उनकी दो फिल्में ‘दीवाना’ और ‘शार्गिद’ रिलीज़ हुई, ये दोनों ही सुपरहिट साबित हुईं। वर्ष 1968 में रिलीज़ हुई एक फिल्म ‘पड़ोसन’ सायरा बानो के सिने कॅरियर में मील का पत्थर मानी जाती है। इस फिल्म ने उन्हें खूब शोहरत दिलाई थीं।

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जब सायरा की जिंदगी का सपना हुआ पूरा

जब सायरा बानो बॉलीवुड में शोहरत की बुलंदियों पर थी, उस वक्त बिना अपने कॅरियर की परवाह किए उन्होंने शादी करने का फैसला लिया। वो भी खुद से 22 साल बड़े आदमी से। जी हां वो शख्स है हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार दिलीप कुमार। सायरा बानो और दिलीप कुमार ने ना सिर्फ बॉलीवुड बल्कि दुनिया के सामने अपने प्यार की मिसाल कायम की है। उन्होंने साबित कर दिखाया कि प्यार के सामने उम्र महज एक नंबर है इससे ज्यादा कुछ नहीं।

दिलीप कुमार से शादी करना सायरा की जिंदगी का सपना था, जिसे उन्होंने 11 अक्टूबर, 1966 को हकीकत में तब्दील किया। दोनों ने इस दिन शादी की थी। महज 12 साल की उम्र में ही सायरा अपना दिल दिलीप कुमार को दे बैठी थी। शादी के समय सायरा की उम्र 22 साल और दिलीप कुमार 44 साल के थे। पिछले 54 सालों से बॉलीवुड की ये दिग्गज जोड़ी साथ है। इन दोनों की कोई संतान नहीं है।

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सायरा-दिलीप ने इन फिल्मों में साथ काम किया

दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी शादी के बाद पहली बार वर्ष 1970 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘गोपी’ में नज़र आई। इसके बाद रियल लाइफ की यह जोड़ी ‘सगीना’, ‘बैराग’ और ‘दुनिया’ जैसी फिल्मों में भी नज़र आईं। दिलीप कुमार के साथ सायरा बानो ने अपने फिल्मी कॅरियर की कुल 5 फिल्में की थीं।

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