सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी को 'सूरमा भोपाली' बनने में लगे थे 20 साल, जाने दिलचस्प किस्सा - BackToBollywood

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सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी को 'सूरमा भोपाली' बनने में लगे थे 20 साल, जाने दिलचस्प किस्सा

सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी को सूरमा भोपाली बनने में लगे थे 20 साल, जाने दिलचस्प किस्सा

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सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी

अक्सर बॉलीवुड में आने से पहले अभिनेता अपना नाम बदल देते हैं, जैसे जितेंद्र का असली नाम रवि कपूर, अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया था. ऐसे ही फिल्म इंडस्ट्री में एक और अभिनेता को नया नाम दे दिया गया. सूरमा भोपाली को तो आप सब जानते होंगे, जिनका असली नाम कुछ और ही था. सूरमा भोपाली का असली नाम सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी है. लेकिन बॉलीवुड में आने से पहले उन्हें जगदीप नाम दिया गया. लेकिन जगदीप कब सूरमा भोपाली बन गए है, किसी को पता नहीं चला.

सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी

फिल्म शोले में जगदीश ने सूरमा भोपाली का किरदार निभाया था. उनका यह किरदार लोगों को बहुत अच्छा लगा. उनका जगदीप से सूरमा भोपाली बनने का किस्सा बहुत ही मजेदार है. जगदीप से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि आप जगदीप है. लेकिन आपको लोग असली नाम से बहुत कम जानते हैं. आपके जेहन में कैसे आया कि भोपाल की भाषा को दुनिया भर में मशहूर कर दें. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- यह लंबा और दिलचस्प किस्सा है.

सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी

सलीम और जावेद की एक फिल्म थी सरहदी लुटेरा जिसमें मैं कॉमेडियन था. मेरे डायलॉग बहुत बड़े थे. मैं फिल्म के डायरेक्टर के पास गया तो उन्होंने कहा और उन्हें बताया कि डायलॉग बहुत बड़े हैं. तो उन्होंने कहा कि जावेद बैठा है, उससे कह दो. जगदीश ने आगे कहा- मैं जावेद के पास गया तो उन्होंने बड़ी ही आसानी से डायलॉग को पांच लाइन में समेट दिया. मैंने कहा कमाल है, यार तुम इतने अच्छे राइटर हो.

सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी

इसके बाद हम शाम के समय बैठे किस्से और कहानियों का दौर चल रहा था. उसी बीच उसने बीच में एक लहजा बोला. क्या जाने किधर कहां कहां से आ जाते हैं. मैंने पूछा- अरे यह क्या कहां से लाए हो तो वह बोले कि भोपाल का लहजा है. मैंने कहा भोपाल से यहांं कौन है. मैंने तो यह कभी नहीं सुना. इस पर उन्होंने कहा कि यह भोपाल की औरतों का लहजा है. वह ऐसे ही बात करती हैं.

सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी

20 साल बाद फिल्म शोले शुरू हुई. मुझे लगा मुझे शूटिंग के लिए बुलाया जाएगा. लेकिन किसी ने मुझे नहीं बुलाया. फिर 1 दिन रमेश सिप्पी का मेरे पास फोन आया. उन्होंने कहा- तुम्हें शोले में काम करना है. मैंने कहा शूटिंग तो खत्म हो गई. तब उन्होंने कहा- नहीं नहीं यह सीन असली है. इसकी शूटिंग अभी बाकी है. बस यहीं से जगदीप के सूरमा भोपाली बनने का सफर शुरू हुआ और उनकी पहचान सूरमा भोपाली के रूप में बन गई.

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