'दांडी मार्च या भूख हड़ताल से नहीं मिली आजादी', Kangana Ranaut ने फिर महात्मा गांधी के 'आंदोलनों' पर किए तीखे वार - BackToBollywood

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'दांडी मार्च या भूख हड़ताल से नहीं मिली आजादी', Kangana Ranaut ने फिर महात्मा गांधी के 'आंदोलनों' पर किए तीखे वार

'दांडी मार्च या भूख हड़ताल से नहीं मिली आजादी', Kangana Ranaut ने फिर महात्मा गांधी के 'आंदोलनों' पर किए तीखे वार

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अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) हर मुद्दे पर अपनी राय रखती हैं। उनके बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते, जिसके लेकर एक्ट्रेस को ट्रोलर्स का सामना भी करना पड़ता है। हाल में एक्ट्रेस ने एक और ऐसा है विवादित बयान दिया है, जिसको लेकर एक्ट्रेस की खूब आलोचना हो रही है। अपनी अपकमिंग फिल्म 'इमरजेंसी' में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) का किरदार निभाने वाली कंगना ने महात्मा गांधी के दांडी मार्च आंदोलन और भूख हड़ताल को लेकर एक बड़ा बयान दे डाला है।

दरअसल, राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' कर दिया गया है। साथ ही वहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फुट ऊंची होलोग्राम प्रतिमा भी लगाई गई है, जिसका पीएम नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया और कर्तव्य पथ का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान कंगना रनौत भी वहां मौजूद थीं।

इसी के बाद एक्ट्रेस ने महात्मा गांधी के आंदोलन दांडी मार्च और भूख हड़ताल को लेकर विवादित बयान दिया। कंगना ने कहा है कि 'हमें दांडी मार्च या भूख हड़ताल करके ही आजादी मिली है तो ऐसा नहीं है'। एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'आजादी के दौरान नेताजी और सावरकर जी के संघर्ष को दरकिनार कर दिया गया था'। ऐसा कोई पहली बार नहीं जब एक्ट्रेस ने देश की आजादी या आंदोलन पर इस तरह का बयान दिया है

इससे पहले भी वो कई बार ऐसे बयान देकर सुर्खियों में आ चुकी हैं। एक्ट्रेस ने पिछले साल 2021 में भी ऐसा ही एक बयान देते हुए कहा था कि 'असली आजादी 2014 में मिली है, जब नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई। 1947 में देश को जो स्वतंत्रता मिली थी वो भीख में मिली थी'। कंगना के उस बयान के सामने आने के बाद उनके ट्विटर अकाउंट को निलंबित कर दिया गया था।

इसके बाद कंगना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था कि 'मैंने बिल्कुल साच कहा है कि 1857 की क्रांति, पहला स्वतंत्रता संग्राम थी, जिसे दबा दिया गया और इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों के जुल्म व क्रूरता और बढ़ गए और करीब एक शताब्दी बाद हमें गांधी जी के भीख के कटोरे में आजादी दी'।



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AutoDesk

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