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फिल्म 'सत्या' की रिलीज के बाद इस गैंगस्टर ने Anurag Kashyap को कर लिया था किडनैप, ऐसे बची थी निर्देशक की जान


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फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई बड़ी और हिट फिल्में दी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने एक दो फिल्मों में अपने अभिनय का भी जलवा दिखाया है। हालांकि, निर्देशक अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। हाल में उनकी फिल्म 'दोबार' रिलीज हुई हैं, जिसमें मुख्य तौर पर तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) नजर आ रही हैं। उनकी ये फिल्म एक साइंस फिक्शन टाइम ट्रैवल फिल्म है, जो स्पैनिश फिल्म 'मिराज' का हिंदी रीमेक है। उनकी इस फिल्म को दर्शकों का मिक्स रिएक्शन देखने को मिल रहा है। इसी बीच निर्देशक का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में अनुराग कश्यप ने अपने से जुड़ा एख बड़ा खुलासा किया है। वीडियो में एक अनुराग कश्यप ने बताया कि कैसे फिल्म 'सत्या' के रिलीज के बाद उन्हें किडनैप कर लिया गया था। हाल में अनुराग कश्यप ने तन्मय भट के यूट्यूब चैनल पर अपना एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने बताया कि फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ को बनाने के दौरान एक गैंगस्टर और क्रिमिनल उनसे संपर्क किया करते थे।

वो चाहते थे कि निर्देशक उनकी जीवन की कहानी को बड़े पर्दे पर एक फिल्म के तौर पर दिखाएं'। निर्देशक ने आगे बताया कि 'मैंने तब मुंबई के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और उन्हें बताया कि मुझे सिक्योरिटी की जरूरत है, तो कमिश्नर ने मुझसे कहा कि आपको इसकी जरूरत नहीं है। अंडरवर्ल्ड तुमसे प्यार करता है, सब तुमसे प्यार करते हैं, आप जाएं। वाकई में, किसी ने मुझे धमकियों भरा फोन नहीं किया'।

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निर्देशक अनुराग कश्यप ने इंटरव्यू में आगे बताया कि 'एक बार गैंगस्टर के दो साथी मेरे घर आए और कहा कि तु्म्हें हमारे साथ जाना होगा। मैंने उनसे पूछा कि आप लोग कौन हैं, लेकिन उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया और उन्होंने दोबारा कहा कि तुम्हें हमारे साथ चलना होगा'। अनुराग कश्यप ने आगे बताया कि 'ऐसा फिल्म ‘सत्या’ की रिलीज के बाद हुआ था, जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि किसी गैंगस्टर की क्रिसमस पार्टी थी। वहां पर मुझे सिंघासन पर बैठाया गया। गोद में बच्चे बिठा दिए। हम लोगों ने फोटो खिंचवाई'।

निर्देशक ने आगे कहा कि 'उन्होंने मुझे खाना खिलाया और ‘मेरी क्रिसमस’ बोला और कहा कि आपकी फिल्म बहुत अच्छी थी'। उन्होंने आगे बताया कि 'फिल्म की रिलीज के बाद मनोज बाजपेयी और सौरभ शुक्ला के साथ भी कुछ ऐसा ही घटा था। साल 1998 की इस फिल्म को अभी भी भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण गैंगस्टर फिल्मों में से एक माना जाता है। यह हिंदी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण टर्निंग प्वॉइंट था'।

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